30 साल पुराने इस केस को लेकर आया कोर्ट का फैसला सुनकर आप भी हो जायेंगे हैरान ……..एक साड़ी, नौ टिफिन बॉक्स, एक टेप रिकॉर्डर और एक कलाई घड़ी की चो’री से जुड़ा 30 साल पहले के मामले को कहीं अब जाकर निपटाया गया है। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) की अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया है। 30 साल से लंबित पड़े इस चो’री के मामले ने न्याय व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। इस तरह की कार्र’वाई साफ तौर पर इशारा करती है कि चो’री से जुड़े मामलों में भी फैसला आने में कई सालों का वक्त लग जाता है।

1980 के दशक में दक्षिण मुंबई में इन सामानों की चो’री की सूचना दी गई थी। अदालत ने सबूतों के अभाव और कई मामलों में, कागजात की खराब स्थिति का हवाला देते हुए इसे बंद करने का फरमान सुनाया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर  इस मामले को बंद करने का फैसला लिया गया है।

हाईकोर्ट ने 30 से अधिक वर्षों से लंबित मामलों को निपटारा करने का आदेश दिया था। इन मामलों में 1980 में लोकमान्य तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज यह मामला भी शामिल था। 2,405 रुपये की साड़ी के चो’री होने के मामले के साथ-साथ राष्ट्रीय पैनासोनिक टेप रिकॉर्डर-कम-रेडियो और 2,700 रुपये की एक कलाई घड़ी चो’री होने का अन्य मामला इसमें जुड़ हुआ था।

शस्त्र अधिनियम के तहत अ’वैध हथि’यारों के अन्य मामलों का भी अदालत ने निपटारा किया है। रिकॉर्ड से पता चला है कि आ’रोपी लंबे समय से ट्रेस नहीं हो पाया है। गैर-जमा’नती वा’रंट जारी होने के बावजूद आ’रोपी को पकड़ने में नाकामी मिली है। इसके अलावा, अभियुक्तों के खिलाफ रिकॉर्ड पर कोई पर्याप्त सबूत या सामग्री नहीं है।

बाबू सवलाराम सहाने नामक एक आ’रोपी के खिलाफ दर्ज किए गए टिफिन बॉक्स की चो’री के मामले में अदालत ने अपने आदेश में यह कहा है। कागजात की वर्तमान स्थिति यह है कि चार्जशीट टुकड़ों में है। कोई भी पंच’नामा रिकॉर्ड पर नहीं है और अधिकांश बयान फटे हुए स्थिति में हैं। अदालत ने किसी भी नतीजे की संभावना न देखते हुए इसे बंद करने का फैसला दिया है।

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