शास्त्री जी के जीवन का ये मार्मिक प्रसंग जरुर जानिए

पांच-छह साल का एक बालक (Lal Bahadur Shastri Hindi Kahani) अपने कुछ साथियों के साथ खेल रहा था। बच्चों ने बगीचे से आम तोड़ने की योजना बनाई, वह भी साथ में चला गया। लेकिन वह दूसरे बच्चों की तरह आम नहीं तोड़ रहा था, बल्कि चुपचाप एक कोने में खड़ा रहा। साथियों के बहुत उकसाने पर भी उसने आम नहीं तोड़े। बगीचे में खिल रहे फूलों पर उसकी नजर पड़ गई। उनमें गुलाब का एक बड़ा फूल देखकर उसका मन लालच उठा। उसने चुपके से उस फूल को तोड़ लिया।ठीक उसी समय बगीचे का माली पहुंच गया। माली को देखते ही सब लड़के वहां से भाग गए। लेकिन वह समझ ही नहीं पाया कि उसे क्या करना चाहिए और वहीं पर खड़ा रहा। माली ने उसे पकड़ लिया। अब माली उससे पूछने लगा, बता कहां है तेरा घर, चल जरा मैं तेरे बाबूजी से तेरी करतूत बता कर आता हूं। यह सुनकर लड़का मायूस हो गया।

Image result for lal bahadur shastri

उसने सहम कर धीमे स्वर में कहा, ‘मेरे पिताजी नहीं हैं। लेकिन मैंने आम नहीं तोड़े हैं, एक फूल तोड़ा है।’ बालक का भोलापन और उसकी सहज आंखें देखकर माली बड़ा प्रभावित हुआ। उसने उसे प्यार से समझाया, ‘तू इतना अच्छा बच्चा है, फिर तो तुम्हें ऐसे काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए। तुम्हें पिटाई से भी बचाने वाला कोई नहीं है। कभी कोई चीज अच्छी लगे तो उसे उसके मालिक से मांग लेनी चाहिए। इस तरह लेना तो चोरी कहलाता है।’

Image result for lal bahadur shastri

बालक को लगा जैसे माली के रूप में उसके जीवन को सही दिशा बताने वाला कोई गुरु मिल गया। उसने तभी अच्छा मनुष्य बनने का संकल्प कर लिया। माली की बात की उसने ऐसी गांठ बांध ली कि उसका जीवन एक मिसाल बन गया। वह बालक और कोई नहीं, लाल बहादुर शास्त्री था। जो आगे चलकर अपनी सचाई, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर देश का प्रधानमंत्री बना।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here