मां बाप बच्चों को बड़ा करने में अपना सबकुछ दाव पर लगा देते हैं। अपनी ख्वाहिशों को मारकर हर बाप अपने बच्चों को जिद पूरी करता है। जब बच्चा पैदा होता है उसी दिन से एक बाप अपने लिए जीना छोड़कर उस बच्चे के जीना शुरू कर देता है। लेकिन बदले में बाप को क्या मिलता है। इसके कई उदाहरण जमशेदपुर में देखने को मिलते हैं। टाटा मुख्य अस्पताल से सेवानिवृत्त डॉ. बलसारा लौहनगरी में किसी पहचान के मोहताज नहीं, लेकिन अपनी संतान द्वारा सताए जाने का मामला बिष्टुपुर थाने में दर्ज कराया था। इसी तरह के 45 से अधिक मामले एसडीओ कोर्ट में दर्ज हैं। जिनके बेटे व बहू ने पिता को घर से बेदखल कर दिया है और अब वह न्याय के लिए चक्कर लगा रहे हैं। कई लोग तो न्याय की आश में दम भी तोड़ चुके हैं।

एसडीओ कोर्ट में काशीडीह निवासी राम अवतार ठाकुर ने 2015 में बेदखल किये जाने का मामला दर्ज कराया था। फैसला अभी आया भी नहीं था कि उनका निधन हो गया। सीतारामडेरा निवासी आरएन सिंह का भी निधन हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2015 में एसडीओ कोर्ट में मामला दर्ज कराया था। आरएन सिंह बर्मामाइंस स्थित नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (एनएमएल) में काम करते थे। उनका आरोप था कि उनके रिटायर्ड होने के बाद जो पैसा उन्हें मिला उसे बैंक में जमा करने के लिए अपने बेटे को दिए। बेटे ने उस पैसे को अपने खाते में डाल लिया। साथ ही बेदखल करने का भी कोशिश की। इनका बेटा बैंक में काम करता है। इसी तरह, कदमा निवासी वीरेंद्र महतो, मानगो निवासी गुप्तेश्वर गुप्ता, कदमा निवासी राम राज राम, परसुडीह निवासी शंभू नाथ घाटी, मानगो दाईगुंट्टू निवासी राम उदित राम, प्रेम चंद्र सिंह, रामा राव, संकट प्रताप सिंह सहित अन्य लोगों ने भी अपने-अपने बेटे व बहुओं से प्र’ताड़ित होकर मामला दर्ज कराया है।

बेटे ने घर में कैद कर रहा था

डॉ. एबी बलसारा को उनके बेटे फरहाद बलसारा व उनकी सहयोगी कामिनी शर्मा ने अपने ही घर में कैद कर रखा था। इसकी शिकायत उन्होंने बिष्टुपुर थाने में दर्ज करायी थी। डॉ. बलसारा सर्किट हाउस एरिया रोड नंबर पांच में स्थित आस्था मनोर हाउस में फ्लैट संख्या चार में रहते थे। फिलहाल वे अपनी बेटी संग अमेरिका में रह रहे हैं। केंद्रीय वरिष्ठ नागरिक संघ के अध्यक्ष शिव पूजन सिंह ने बताया कि वे डॉ. बलसारा से मिलने गए थे तब वह काफी डरे हुए थे।

बेटा नहीं दे रहा हर्जाना

कदमा निवासी रामराज राम टाटा स्टील में कार्यरत थे। जब वे रिटायर्ड हुए तो घर में एक दुकान खोल ली। इसी बीच बेटा उनको प्रताड़ित करने लगा। घर से बेदखल करने की कोशिश की। इससे परेशान होकर रामराज राम ने वर्ष 2015 में एसडीओ कोर्ट में मामला दर्ज कराया। इस मामले में सात माह पूर्व फैसला सुनाया गया। जिसमें बेटा द्वारा पिता को हर माह दस हजार रुपये व बेटे को घर बेदखल करने का आदेश जारी हुआ। इसके बावजूद रामराज को हर्जाना नहीं मिल रहा है।

मां-बाप शौच को जाते बाहर

मानगो निवासी गुप्तेश्वर प्रसाद अपने बेटा-बहू से खासे परेशान हैं। वे टाटा स्टील में कार्यरत थे। 2001 में रिटायर्ड होने के बाद वे अपना घर बनवाए। इसके बाद से उनके बेटा व बहू उनके घर पर कब्जा कर लिए। गुप्तेश्वर व उनकी पत्नी को प्रताड़ित किया जाता है। इससे परेशान होकर अप्रैल 2018 में विधिक सेवा प्राधिकार में शिकायत दर्ज करायी। दो रूम को कब्जा कर रखा है। शौचालय की सुविधा भी उन्हें नहीं दी जाती है। जिसके कारण बाहर में शौच करने को जाना पड़ता है।

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