ब्राह्मण आखिर क्यों नहीं खाते कभी लहसुन-प्याज, बजह जानने के बाद आप भी खाना छोड़ देंगे

नमस्कार दोस्तों, अगर आप धर्म और शास्त्रों को जानने और मानने वाले सच्चे भारतीय हैं, तो आप ये बात जरूर ही जानते होंगे कि ब्राह्मण लहसुन-प्याज का सेवन नहीं करते हैं। वैसे तो इसके पीछे कई तरह की कहानियां बताई जाती है, लेकिन इनमें से कुछ तो ऐसे बेतुके होते हैं, जिसपर विश्वास करना भी मूर्खता के अलावा और कुछ नहीं होता।

लेकिन आज आपको कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बल्कि शास्त्रों के अनुसार कई कही गई अहम बात बताने वाले हैं। लेकिन इससे पहले बता दें कि मौजूदा समय में ब्राह्मण भी इस बात को भूलते जा रहे हैं कि उनके पूर्वज इस चीज से दूर रहे हैं। ऐसे में नए और मॉडर्न ब्राह्मण के लिए लहसुन-प्याज का सेवन ज्यादा कुछ मायने नहीं रखता है।

दरअसल, शास्त्रों के अनुसार बताया जाता है कि, सुमुद्र मथन के दौरान अम्रत का कलश निकला था और इस दौरान भगवान विष्णु सभी देवताओं को अमर होने के लिए अमृत बाट रहे थे। इसी बीच राहू और केतु नाम के दो राक्षस अपना रूप बदलकर अम्रत लेने के लिए कतार में खड़े हो गए और भगवान विष्णु ने राक्षसों को भी अमृत पिला दिया।

लेकिन इस बात का पता चलते ही देवताओं ने राक्षसों का धड़ सिर से अलग कर दिया। हालांकि तब तक उनके मुंह के अंदर अमृत की कुछ बूंदे चली गई थीं। कथाओं के अनुसार बताया जाता है कि, जब भगवान विष्णु ने राक्षसों पर प्रहार किया था तो उनके खून के कुछ बूंद धरती पर गिर गए और वहीं से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई।

बताया जाता है कि यही कारण है कि जब आप प्याज-लहसुन खाते हैं तो आपके मुंह से दुर्गंध आती रहती हैं और ब्राह्मण इसलिए प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते क्योंकि उनका मानना है कि इनमें राक्षसों का वास होता है और यह राक्षसी भोजन के श्रेणी में आता है!

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