हर बाप का सपना होता है कि उसकी संतान जिंदगी में कामयाब हो। अपनी औलाद के लिए हर मां बाप दिन रात एक कर देते हैं। जब संतान कामयाब होती है तो उसका अलग ही सुकून होता है। ऐसी ही कहानी है सुरेंद्र की जिन्होंने अपनी लाडली बेटी को क्रिकेटर बनाने के लिए अपनी प्रॉपर्टी बेच डाली। बेटी ने भी निराश नहीं किया और भारतीय महिला टीम की क्रिकेटर बनकर पिता का सपना पूरा किया ।

पिता-पुत्री के त्याग की कहानी है राजस्थान के चुरू निवासी प्रिया और सुरेंद्र पुनिया की। 22 साल की बेटी को टीम इंडिया में खेलते देख के सपने के खातिर उन्होंने अपनी संपत्ति बेचकर पैसे का इंतजाम किया और साल 2010 में जयपुर स्थित हरमाड़ा में 22 लाख रुपए की कीमत में 1.5 बीघा जमीन खरीदी। बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए बकायदा क्रिकेट पिच बनवाई। अपने इस फैसले पर सुरेंद्र कहते है कि मैं वहां हमेशा से ही स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनाना चाहता था। लेकिन मेरी बेटी ने बैडमिंटन के प्रति कोई उत्साह ही नहीं दिखाया। वह क्रिकेट खेलना पसंद करती थी। वह लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी, तो फिर मैंने तय किया कि मैं यहां क्रिकेट की पिच और नेट्स ही लगवा दूं।

चुरु में रहने वाली प्रिया दिल्ली की टीम के लिए खेलती हैं। वह ओपनिंग बल्लेबाज हैं। उन्हें उम्मीद थी कि उनका चयन टीम इंडिया में हो जाएगा। प्रिया को पूरा भरोसा था कि चयनकर्ता उनके उम्दा खेल को संज्ञान में लेते हुए उन्हें नैशनल टीम में मौका देंगे, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका। इस पर वह कहती है, उस वक्त मुझे सिलेक्शन की पूरी उम्मीद थी और ऐसा न होने पर मैं निराश भी हुई थी,लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैं जानती थी कि मेरा वक्त भी आएगा। इस बार प्रिय हार नहीं मानी और जी जान से जुट गई अपने सपने को पूरा करने में, आखिरकार पूरे तीन साल बाद मेहनत रंग लाई और उनका चयन भारतीय टीम में कर लिया गया।

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