New Delhi:  गुलाब का फूल देकर दोस्ती या मोहब्बत का इजहार किया हो या न किया हो, लेकिन प्रपोज-डे पर आप अपनी बात आगे बढ़ा सकते हैं। किसी को दोस्त बनाना चाहते हों या जीवनसाथी, झिझक छोड़िए और अपने दिल की बात कह डालिए। आज हम उन लोगों की कहानी बता रहे हैं जिन्होंने बेहिचक अपनी बात कह डाली। 

हमारी मुलाकात मुंबई में हुई थी। मुलाकात के करीब तीन साल बाद मैं सुशीला को प्रपोज करने का प्लान करने लगा था। मैं इस बात को लेकर काफी डरा हुआ था कि अगर उसने न कह दी तो मेरा क्या होगा। हमारी दोस्ती काफी अच्छी थी और इसे मैं खोना नहीं चाहता था।  एक दिन हिम्मत जुटाई और बोल दिया कि मैं तुम्हारा होना चाहता हूं। उन्होंने हां कर दिया। यह सुनते ही लगा जैसे मैंने सारा जहां जीत लिया।सुशीला मुंबई में पली बढ़ीं हैं। उनकी सादगी का मैं कायल था।  उन्हें दिखावा बिल्कुल भी पसंद नहीं है।  हमारी दोस्ती आगे बढ़ी और हम एक-दूसरे को अच्छे से जानने लगे।

वहीं एक और कहानी दिल जीत रही है। बात करीब आठ साल पुरानी है। मिठाईवाला चौराहा के पास का ओवरब्रिज नया-नया बना था। सुनील और मैं अलग जाति के थे। दोनों दोस्त थे। स्कूटी पर मैं उनके साथ थी। अचानक स्कूटी रुकी। उन्होंने स्कूटी की डिग्गी से बुके निकाला, घुटने पर आए और बोले- आप मुझसे शादी करेंगी। तब से हम साथ हैं। मुझे इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि कम बोलने वाले, इंट्रोवर्ट सुनील मुझे इस तरह से प्रपोज करेंगे। सुनील ही वह शख्स हैं जो मुझे मेरे पैरेंट्स से भी ज्यादा जानते हैं। मेरे बारे में उनकी एनालिसिस एकदम करेक्ट होती है।

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