New Delhi : पिता, ये सिर्फ हिंदी में लिखा एक शब्द नहीं है। समझो तो पूरा संसार इसमें समाया है। आप जो लोग भी इस स्टोरी को पढ़ रहे हैं वो आज जो कुछ भी हैं अपने पिता की वजह से ही हैं। पिता वो पहचान है जिसे आप दुनिया की किसी रबड से नहीं मिटा सकते। जब तक आप दुनिया में हैं पिता की पहचान साये की तरह आपके साथ रहेगी।

खैर आज हम आपको उस पिता के बारे में बता रहे हैं जिसने अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर उसके लिए जमीन गिरवी रखकर उसे CRPF में भेजा और वो देश के लिए शहीद हो गया। दरअसल,
देश का एक पिता सोचता है कि उसका बच्चा पढ़ लिख लेगा तो उसे नौकरी मिल जाएगी। नौकरी के बाद उसके घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी। इस उम्मीद में हर इंसान अपने बच्चों को पढ़ाता है। बच्चे भी पढ़ लिख कर नौकरी की तलाश में लग जाते है और परिवार के लिए नौकरी करते है। लेकिन इससे उलट गरीबी के बावजूद शहीद रमेश यादव के पिता ने अपने बेटे को देश की हिफाजत के लिए नौकरी करने को कहा।

वाराणसी के तोफापुर गांव निवासी श्याम नारायण यादव का परिवार खेती पर आश्रित है। श्याम नारायण बताते हैं कि रमेश को पढ़ाने और सीआरपीएफ में भर्ती कराने के लिए उन्होंने घर के सामने की तीन बीघा जमीन पांच लाख रुपये में गिरवी रख दी थी। श्याम नारायण का मानना था कि बेटा सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा और परिवार की आर्थिक तंगी भी दूर हो जाएगी।

इस बार जब रमेश छुट्टी पर आए थे तो पिता से उन्होंने कहा था कि अबकी बार जब भी आएंगे तो गिरवी जमीन को छुड़ा लेंगे। पिता श्यामनारायण रोते हुए कह रहे थे कि लग रहा है शायद अब गिरवी रखी जमीन कभी मुक्त नहीं हो पाएगी। घर का खेवनहार तो बीच मंझधार में ही छोड़ कर अनंत यात्रा पर चला गया। इसी साल फरवरी में रमेश यादव पुलवामा में शहीद हो गए।

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