कृष्णा तीसरी कक्षा में पढ़ता है। वो शहीद का बेटा है। पुलमावा हमले से पहले उसे पता नहीं था शहादत क्या होती है। उसे तो ये भी नहीं पता था कि उसके पिता भी बरसों पहले देश के लिए शहीद हो चुके हैं। मां ने हमेशा उससे यह बात छिपाकर रखी लेकिन जब उसको पता लगा तो वो अपने पिता की मूर्ति से जाकर लिपट गया।

राजस्थान के भिवाड़ी सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपपंजीयक सुनीता यादव के पति होशियार सिंह यादव सीआरपीएफ में तैनात थे। उनकी शादी को महज 10 माह ही बीते थे कि 11 अप्रैल 2009 को छत्तीसगढ़ के रांची में नक्सली हमले में शहीद हो गए। सुनीता उस समय गर्भवती थी। पति के शहीद होने के चार माह बाद बेटे का जन्म हुआ। वर्ष 2013 में सुनीता का शहीद कोटे से राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ।

जब कभी कृष्णा अपने पिता के बारे में पूछता तो हमेशा उनके लौटने की बात कहती। छोटे से बच्चे के सवाल सुनकर हमेशा सुनीता हमेशा सहम जाती। लेकिन पुलवामा हमले के बाद कृष्णा को शहादत का असली मतलब समझ आ गया। कृष्णा अभी तीसरी कक्षा में पढ़ रहा है। सुनीता चाहती हैं कि कृष्णा चाहे कुछ भी बने, लेकिन उससे पहले वह एक अच्छा आदमी बने। सुनीता वर्तमान में अलवर के विजय नगर में रहती हैं। उनका ससुराल अहीर माजरा है। शहीद होशियार सिंह की वहां पर प्रतिमा भी लगी है।

सुनीता ने बताया कि पति के ड्यूटी पर जाने के बाद वह हर दिन मोबाइल पर बात करती थी। 11 अप्रैल को पति का फोन नहीं आया तो दोपहर डेढ़ बजे सुनीता ने ही फोन किया। उस समय उनके एक साथी ने फोन उठाया। और कहा कि उनके चोट लग गई है। वह अस्पताल में हैं।

अनहोनी की बात मन में आते ही असलियत बताने की गुहार की। आखिर में सुनीता को सच्चाई का पता लग गया। फिर मानों सुनीता पर दुखों का पहाड़ टूटा। पांच माह की गर्भवती सुनीता को अपने पति के शहीद होने का दुख था तो पेट में पल रहे बच्चे के भविष्य की चिंता। उन्होंने बताया कि भारत ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया है। पाकिस्तान इसी भाषा को सम झता है। सुनीता ने बताया कि शहीद परिवारों को मिलने वाला लाभ कई कारणों से समय पर नहीं मिल पाता। इससे शहीदों के परिजनों को काफी परेशानी होती है।

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