कुलभूषण के बाद अब पाकिस्तान उठा सकता है ये बड़ा कदम, दिए गए ये बड़े संकेत…पूर्व भारतीय नौसैनिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी जिस पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला भारत के हक़ में आया और फ़िलहाल कुलभूषण की फांसी पर रोक का आदेश दिया गया है| आईसीजे ने 15-1 के बहुमत से कहा कि जाधव की मौत की सजा पर रोक बरकरार रहेगी| आइये हम आपको बताते है की पाकिस्तान अब कौन से कदम इस मामले में उठा सकता है (kulbhushan jadhav case in icj)  | भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ)ने पाकिस्तान को कहा है कि वह कुलभूषण को दी गई मौत की सजा की समीक्षा करे और उन्हें राजनयिक पहुंच मुहैया कराए| अब सवाल ये उठता है कि क्या इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले को मानने के लिए कोई देश मजबूर हो सकता है या नहीं? सैद्धांतिक तौर पर पाकिस्तान अईसीजे का फैसला मानने के लिए बाध्य होगा|

भारत की अपील वियना संधि पर आधारित है| इस संधि पर पाकिस्तान और भारत ने हस्ताक्षर किए हैं| इस संधि के मुताबिक अगर कोई मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाता है तो दोनों देशों को इस कोर्ट में दिए फैसले को मानना होगा| अब आईसीजे कोर्ट के निर्णय के बाद पाकिस्तान की सरकार संयुक्त राष्ट्र में जा सकता है| पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने ICJ के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह कानून के आधार पर इस मामले में आगे बढ़ेंगे|

अमेरिका ने नहीं माना था ICJ का फैसला
वियना संधि के तहत भले ही भारत और पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ)के फैसले को मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा लेकिन जब अमेरिकी कोर्ट ने मैक्सिको के 51 नागरिकों को दोषी मानकर सजा सुनाई थी और मैक्सिको ने आईसीजे के इसकी अर्जी दाखिल की तो 2004 में आईसीजे ने अमेरिका के खिलाफ फैसला सुनाया लेकिन अमेरिका ने फैसले को नहीं माना था |


कहां है ये कोर्ट
कोर्ट नीदरलैंड में है| इसे World Court, ICJ और The Hague भी कहा जाता है|
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, संयुक्त राष्ट्र यानी UN का न्यायिक अंग है|
इसकी स्थापना 1945 में हॉलैंड के शहर हेग में की गई थी| 1946 से इसने काम करना शुरू कर दिया था|
क्‍या काम करता है
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस कानूनी विवादों का निपटारा करती हैं|
संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय भी देते हैं.
इस न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं| इन्‍हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद मिलकर चुनती है| कार्यकाल 9 साल का होता है|
कोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है|
न्यायधीशों की नियुक्ति के संबंध में मुख्य शर्त ये होती है की दो न्यायधीश एक देश से नहीं चुने जा सकते|
इसके कुल 192 देश सदस्य हैं.
भारतीय जज के तौर पर यहां दलवीर भंडारी हैं|

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