कर्नाटक सरकार की आज यानी गुरुवार को शक्ति परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट ने कल फैसला सुनाया कि 15 बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। बागी विधायकों को कोर्ट से बड़ी राहत मिला। कोर्ट के फैसले ले अनुसार बागी विधायकों को विश्वास मत के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। आज यानी गुरुवार को कर्नाटक के विधानसभा में मौजूदा सरकार को बहुमत साबित करना है। कोर्ट ने कहा कि स्पीकर बागी विधायकों पर जल्दी फैसला लें। बागी विधायक विधानसभा में आने के लिए स्वतंत्र हैं। फैसला देते वक़्त चीफ जस्टिस ने कहा कि – हमारा मकसद सिर्फ लोकतांत्रिक संतुलन बनाये रखना है। कर्नाटक के स्पीकर ने इस फैसले का स्वागत किया।

16 बागी विधायकों में से 15 विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाला था कि विधानसभा के स्पीकर उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। जिसके बाद मौजूदा सरकार अल्पमत में आ जाएगी। 15 महीने पुरानी सरकार पर पिछले 6 जुलाई से संकट की बादल मंडरा रहे हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने मंगलवार को तीन घंटे से अधिक समय तक चलने वाली सुनवाई के समापन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसका फैसला कल सुना दिया गया।
कर्नाटक विधानसभा में 224 सदस्य हैं। 16 विधायकों के इस्तीफे की बाद यह संख्या 208 की हो जायेगी। फिर किसी भी पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 105 विधायकों की जरुरत होगी। अगर स्पीकर इनके इस्तीफे को स्वीकार कर लेते हैं तो भारतीय जनता पार्टी बड़ी आसानी से बहुमत साबित कर पाने में सफल रहेगी। भारतीय जनता पार्टी के पास अभी 105 विधायक हैं।

कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के बागी विधायकों ने इस्तीफे की पीछे के कारण को सरकारी के मंत्रियों के मनमानी रवैये को बताया था। विधायकों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया कि कर्नाटक विधानसभा स्पीकर ने जानबूझकर उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया ।

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