इंडियन आर्मी ने एक बार फिर पेश की मानवता की मिसाल, प्रोटोकोल तोड़ बच्चे की लाश को उसके घर पाकिस्तान को सौंपा…मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। यह साबित किया है हमारी इंडियन आर्मी ने। आर्मी के जवानों ने प्रोटोकोल तोड़कर बच्चे की ला’श को पाकिस्तान को खुद सौंपने का फैसला लिया है।

इंडियन आर्मी ने कल गुरेज सेक्टर में एक बच्चे की ला’श को किशनगंगा नदी से निकाला था। ला’श को रिकवर करके पाकिस्तान को हॉटलाइन पर सूचित कर दिया गया है। आर्मी खुद ही बच्चे की ला’श को पाकिस्तान को सौंपेगी।

पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों के बारे में तो आप बखूबी परिचित ही होंगे। इनके संबंध हमेशा से ही ऐतिहासिक और राजनैतिक मुद्दों की वजह से त’नाव में रहे हैं। ऐसे में इंडियन आर्मी का यह कदम सराहनीय है।

किशनगंगा नदी को लेकर दोनों देशों के बीच क्या रहा है वि’वा’द

क्या है किशनगंगा परियोजना

किशनगंगा एक नदी है जो जम्मू कश्मीर के सोनमर्ग के किशनसर झील (कृष्णसर झील) से शुरू होकर पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र में प्रवेश करती है। भारत ने बांदीपुर से 5 किलोमीटर दूर इस नदी पर बांध का निर्माण किया है जिससे 330 मेगावाट की जलविद्युत उत्पन्न करने की योजना है।

पाकिस्तान से क्या है इस पर विवाद

दरअसल शुरू से ही पाकिस्तान का मानना है कि किशनगंगा में बांध बनाने से उसके इलाके में आने वाले नदी के पानी पर असर पड़ेगा। पाक इसे 1960 सिंध जल समझौता का उल्लंघन मानते हुए आईसीए और वर्ल्ड बैंक के सामने चक्कर लगा रहा है।

गौरतलब है कि सिंधु नदी पर पाकिस्तान की 80 प्रतिशत कृषि की सिंचाई निर्भर करती है। इसे लेकर पाक का दावा है कि इस बांध के शुरू होने से ना सिर्फ नदी का रास्ता बदलेगा बल्कि पाकिस्तान में बहने वाली नदियों का जलस्तर भी कम होगा।

बता दें कि पहली बार किशनगंगा नदी पर बांध बनाने की शुरूआत भारत ने सन् 2007 में की थी। इसके 3 साल बाद ही पाकिस्तान ने यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठा दिया था।

इसके बाद सुनवाई पूरी होने तक इस परियोजना का काम 3 साल के लिए बंद पड़ा रहा लेकिन साल 2013 में आए अंतराष्ट्रीय कोर्ट के फैसले ने भारत के इस काम को सही ठहराते हुए इसे जारी रखने को कहा। कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि किशनगंगा परियोजना सिंधु जल समझौते के अनुरूप है और भारत ऊर्जा उत्पादन के लिए इसके पानी को मोड़ सकता है।

इस फैसले से असंतुष्ट पाक ने इसे रोकने के लिए विश्व बैंक से अपील की थी जिसके बाद उसने भी भारत के हक में ही फैसला सुनाया है।

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