आकाश विजयवर्गीय की माफ़ी को लेकर, भाजपा ने दिखाई नई नौटंकी!….लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha Election 2019 ) में भारी मतों से जीत के बाद देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी पीएम मोदी (PM Narendra Modi ) की भाजपा सबसे बड़ी नौटंकीबाज बनकर सामने आ रही है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे भाजपा के आलाकमानों के दिखावे को भांपा जा सकता है। बीजेपी की एक रणनीति है कि जब उनकी पार्टी में कोई नेता, विधायक या सांसद किसी बड़े जंजाल में फंस जाए ( दोषी साबित हो जाए ) तो पहले बड़ी-बड़ी बातें बनाकर, सख्त कार्रवाई की मांग करके कहा जाता है कि ऐसे लोगों की पार्टी में कोई जगह नहीं है, लेकिन मामला शांत होने पर चुपके से ‘माफ़ी’ शब्द का इस्तेलाम करके सब कुछ सामान्य कर लिया जाता है। कुछ समय पहले इंदौर में हुए बल्लेकांड का भी यही अंजाम हुआ। भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) के विधायक पुत्र आकाश (Akash Vijayvargiya) ने अब नगर निगम अफसर को बैट से पीटने के मामले में माफ़ी मांग ली है।

 माफ़ी है समाधान ?

जब इंदौर के विधायक आशाक विजयवर्गीय के बल्लेकांड की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मामले की कड़ी आलोचना की थी। तब मीडिया के सामने पीएम का बयान आया था कि बेटा चाहे किसी का भी ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों को पार्टी में रहने का कोई हक़ नहीं है। चूंकि मीडिया जनता तक अपनी बात पहुंचाने का सबसे अच्छा माध्यम होता है, तो फिर पीएम के जैसे ही भाजपा के कई नेताओं ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी, तो कई नेताओ जो पहले बल्लेकांड का समर्थन कर रहे थे उन्होंने पीएम के डर या यूं कहे तो आदेश के बाद चुप्पी साध ली!

पकड़ा गया पीएम मोदी का झूठ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल्लेकांड के बाद यह भी कहा था कि मामले का समर्थन करने वाले नेताओं की भी सूची बनाई जाए और सभी पर कार्रवाई की जाए , लेकिन अभी तक ऐसा कुछ हुआ नहीं। इतना समय बीत गया, लेकिन पार्टी ने आरोपी आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ भी कोई सख्ती नहीं दिखाई। (नोटिस को छोड़कर ), यहां तक की आकाश के समर्थकों के नाम भी उजागर नहीं किये गए, जबकि सभी जानते हैं कि बल्लेबाज़ विधायक के समर्थन में कौन-कौन थे। अब आकाश की माफ़ी के बाद सख्त कार्रवाई का आदेश देने वाले पीएम मोदी ही बड़ा दिल करके आकाश को माफ़ी दे देंगे! मतलब मामला यही हो गया समाप्त! ये हैं भाजपा और उनके प्रधान की सच्चाई ! और ऐसा नहीं है कि ये सच्चाई पहली बार सामने आई हो। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें भी भाजपा के दोहरे रवैए से पर्दा उठ चुका है, लेकिन मोदी भक्तों की बाढ़ के कारण ये सभी मामले दब जाते हैं।

लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी ऐसा मामला देखने को मिला था। तब पीएम ने साध्वी प्रज्ञा के बयान पर जिसमे उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था) सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे और अपना कद बढ़ा करने के लिए यह भी कह दिया था कि मैं उनसे बात नहीं करूंगा। इसके बाद भोपाल से भारी मतों से साध्वी प्रज्ञा ने भाजपा को जीत दिलाई, उनकी जीत ने उनके सारे पाप धो दिए और अब बीजेपी भी इस मामले को भूल चुकी है। ऐसे और कई मामले मिल जाएंगे, जिनमें तारणहार भाजपा अपने नेता, मंत्री, विधायक और सांसदों के किये पर माफ़ी के बाद सब कुछ भूल जाती है!

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